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दर्दनाक सड़क हादसा: सफर में बुझ गया घर का चिराग, मोहम्मद चांद बाबू की मौत से परिवार में पसरा मातम

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सिंघिया/समस्तीपुर, 20 अगस्त। कुछ सफर मंजिल तक पहुंचने के लिए होते हैं, लेकिन कभी-कभी रास्ते में ही जिंदगी अपना सबसे कठिन फैसला सुना देती है। एक ऐसा ही दर्दनाक हादसा मोहम्मद चांद बाबू के परिवार के साथ हुआ। करीब 30 वर्षीय चांद बाबू की बाइक दुर्घटना में मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची, पूरे परिवार की खुशियां एक पल में मातम में बदल गईं।यह घटना सिंघिया प्रखंड के बलहा गांव का है।
चांद बाबू, मोहम्मद हुसैन उर्फ मुन्ना भाई के पुत्र और आलम की खबर के संपादक मोहम्मद आलम के भतीजे थे। बताया गया कि वह सहरसा से लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में हुए सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली। हादसे की खबर जिसने भी सुनी, कुछ पल के लिए जैसे यकीन ही नहीं कर पाया कि अभी जिस शख्स के घर लौटने का इंतजार हो रहा था, अब वह कभी वापस नहीं आएगा।
जिस घर में लौटने का इंतजार था, वहां पहुंची मौत की खबर
घरवालों के लिए किसी अपने के सफर पर निकलने का मतलब होता है—वह लौटेगा, दरवाजे पर दस्तक देगा और घर फिर उसकी आवाज से भर जाएगा। लेकिन चांद बाबू के घर उस दिन इंतजार के बजाय ऐसी खबर पहुंची, जिसने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया।
माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस बेटे को उन्होंने अपनी आंखों के सामने बड़ा होते देखा, जिसके भविष्य को लेकर सपने संजोए थे, उसी बेटे को अचानक खो देने का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
घर में चीख-पुकार और सिसकियों का माहौल है। परिवार के लोगों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हर तरफ एक ही सवाल है—इतनी जल्दी क्यों चला गया अपना चांद?
मोहल्ले और समाज में भी पसरा सन्नाटा
चांद बाबू की मौत की खबर सिर्फ परिवार तक सीमित नहीं रही। जैसे-जैसे लोगों को हादसे की जानकारी मिली, मोहल्ले और आसपास के इलाके में शोक की लहर फैल गई।
जो लोग उन्हें जानते थे, उनके लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं थी। रिश्तेदार, परिचित और समाज के लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं, लेकिन इस गहरे दुख के सामने हर शब्द छोटा पड़ रहा है।
किसी के पास परिवार के आंसुओं का जवाब नहीं है और न ही उस खालीपन को भरने के लिए कोई शब्द।
मां-बाप की आंखों के सामने टूट गया सपना
एक माता-पिता के लिए संतान को खोने से बड़ा दुख शायद ही कोई हो। जिस बेटे के हाथों में एक दिन उनके बुढ़ापे का सहारा बनने की उम्मीद थी, वही बेटा उन्हें हमेशा के लिए छोड़ गया।
मां की आंखें बार-बार दरवाजे की तरफ उठती हैं। शायद दिल अब भी इस सच्चाई को स्वीकार करने को तैयार नहीं कि उनका बेटा वापस नहीं आएगा।
पिता के लिए भी यह दुख किसी पहाड़ से कम नहीं। बेटे को खोने का दर्द चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा है। परिवार के लोग उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन खुद उनकी आंखों से आंसू बह रहे हैं।
एक हादसा और हमेशा के लिए बदल गई जिंदगी
सड़क हादसे अक्सर कुछ ही सेकंड में ऐसी तबाही छोड़ जाते हैं, जिसका दर्द परिवार वर्षों तक नहीं भूल पाता। चांद बाबू के साथ हुआ हादसा भी इसी दर्द की एक तस्वीर बन गया है।
एक बाइक, एक सफर और घर लौटने की उम्मीद—सब कुछ सामान्य था। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर परिवार के लिए जिंदगी का सबसे दुखद सफर बन जाएगा।
करीब 30 साल की उम्र में जिंदगी का यूं खत्म हो जाना परिवार के लिए किसी असहनीय आघात से कम नहीं है।
अब यादों में रह गए चांद बाबू
चांद बाबू अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें परिवार और करीबियों के बीच हमेशा रहेंगी। उनकी आवाज, उनका चेहरा, उनके साथ बिताए पल और उनसे जुड़ी छोटी-छोटी बातें अब परिवार के लिए जीवन भर की पूंजी बन गई हैं।
किसी अपने की मौत के बाद सबसे कठिन समय वही होता है जब लोग चले जाते हैं और यादें रह जाती हैं। घर के किसी कोने में रखी चीज, किसी रास्ते की याद या अचानक सुनाई देने वाली कोई परिचित आवाज—सब कुछ बीते हुए व्यक्ति की याद दिलाता है।
आज चांद बाबू के परिवार के सामने भी यही खालीपन है।
परिवार के दुख में पूरा इलाका साथ
इस दुख की घड़ी में रिश्तेदारों, मोहल्ले और समाज के लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना जताई है। सभी ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
एक घर का चिराग बुझ गया है। एक मां की गोद सूनी हो गई, एक पिता का सहारा छिन गया और परिवार की जिंदगी में ऐसा खालीपन आ गया, जिसे शायद समय भी पूरी तरह नहीं भर पाएगा।
चांद बाबू की मौत सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि उन तमाम सपनों का अचानक टूट जाना है, जिन्हें उनके परिवार ने उनके साथ देखा था।
आज घर में चांद बाबू नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हैं। उनकी तस्वीरें हैं। उनकी बातें हैं। और सबसे बढ़कर, उन लोगों की आंखों में उनका चेहरा है, जो उन्हें कभी भूल नहीं पाएंगे।
मरहूम मोहम्मद चांद बाबू की अल्लाह ताला उनको जन्नत में आला से आला दर्जा नसीब फरमाए (आमीन) अरुण के म-बाप परिवार वालों को इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।

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